परिचय
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा कर दी। यह छोटी सी पार्टी, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते थे, अचानक लोकसभा में पाँचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन गई। इस विलय ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC के भीतर चल रहे संकट को और गहरा कर दिया है।
मुख्य तथ्य
- विलय की घोषणा: 20 TMC सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सूचित किया कि वे NCPI में शामिल हो गए हैं।
- पार्टी का पंजीकरण: NCPI का गठन जनवरी 2023 में हुआ था और इसका पंजीकृत कार्यालय हावड़ा के संकराइल में स्थित है।
- पार्टी की पृष्ठभूमि: NCPI ने 2023 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में तीन सीटों पर चुनाव लड़ा था और पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनावों में भी भाग लिया था।
- संस्थापक: पार्टी के संस्थापकों में उत्तिया कुंडू और शेवली कुंडू शामिल हैं, जो एक स्थानीय अखबार और एनजीओ भी चलाते हैं।
विस्तार से जानकारी
हावड़ा का वह मकान
हावड़ा के संकराइल कस्बे के हटगाछी गाँव में एक संकरी गली में स्थित यह दो मंजिला मकान अब तक किसी की नज़र में नहीं आया था। लेकिन अब यह NCPI का पंजीकृत कार्यालय है और देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय निवासी उत्तम दास ने बताया, "हम जानते थे कि यहाँ एक पति-पत्नी एनजीओ और स्थानीय अखबार चलाते हैं, लेकिन यह किसी राजनीतिक पार्टी का कार्यालय है, यह तीन साल पहले पता चला।"
पार्टी का गठन और चुनावी इतिहास
NCPI के महासचिव संतनु डे ने बताया कि पार्टी बनाने की पहली बैठक जून 2022 में हुई थी और जनवरी 2023 में इसे पंजीकृत किया गया। पार्टी के लगभग 15 संस्थापक सदस्य हैं जो विभिन्न क्षेत्रों से आए हैं। पार्टी ने 2023 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में तीन सीटों पर चुनाव लड़ा, हालांकि वह जीत नहीं पाई। शेवली कुंडू ने बताया कि त्रिपुरा चुनाव में वे स्वतंत्र रूप से लड़े थे, लेकिन वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ थे।
विलय पर भ्रम
विलय की घोषणा के बाद NCPI के अंदर ही भ्रम की स्थिति है। पार्टी के युवा महासचिव तितास भट्टाचार्य ने कहा, "हम TMC सांसदों के विलय के स्वागत करते हैं। कल तक हम एक छोटी पार्टी थे, लेकिन अचानक सब कुछ बदल गया। हालांकि, हमें नहीं पता कि विलय का फैसला किसने लिया। हम अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं।" वहीं, TMC के बागी गुट के नेता काकोली घोष दस्तीदार ने बताया कि ज्योतिप्रकाश चटर्जी NCPI के अध्यक्ष हैं।
प्रभाव
इस विलय ने TMC में पहले से चल रहे संकट को और बढ़ा दिया है। पिछले महीने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC के 80 में से 59 विधायकों ने अलग गुट बना लिया था। अब 20 सांसदों के NCPI में जाने से पार्टी की स्थिति और कमजोर हुई है। NCPI अब लोकसभा में भाजपा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और द्रमुक के बाद पाँचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन गई है।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- यह घटना दर्शाती है कि कैसे एक छोटी सी पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
- TMC के भीतर बढ़ता असंतोष पार्टी के भविष्य के लिए चिंता का विषय है।
- NCPI का उदय बताता है कि क्षेत्रीय दलों के भीतर गुटबाजी किस तरह नए राजनीतिक समीकरण बना सकती है।
FAQ
NCPI क्या है?
नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) एक पंजीकृत अमान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है, जिसका गठन जनवरी 2023 में हुआ था। इसका पंजीकृत कार्यालय हावड़ा के संकराइल में स्थित है।
20 TMC सांसदों ने NCPI में विलय क्यों किया?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC में असंतोष बढ़ गया। 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को सूचित किया कि वे NCPI में शामिल हो गए हैं, जिससे यह पाँचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन गई।
NCPI का मुख्यालय कहाँ है?
NCPI का पंजीकृत कार्यालय हावड़ा के संकराइल कस्बे के हटगाछी गाँव में एक दो मंजिला मकान में है।
NCPI के संस्थापक कौन हैं?
पार्टी के संस्थापकों में उत्तिया कुंडू और शेवली कुंडू शामिल हैं, जो एक स्थानीय अखबार और एनजीओ भी चलाते हैं।
स्रोत: www.hindustantimes.com