मुख्य तथ्य
चेन्नई की एक विशेष एनआईए अदालत ने खाजा मोइदीन और उनके सहयोगी अंसार मीरान को आईएसआईएस से जुड़े आतंकवादी आरोपों में बरी कर दिया है। यह फैसला 10 जून को सुनाया गया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी किसी आतंकी संगठन से जुड़े थे या उन्होंने कोई साजिश रची।
मामले का विवरण
एनआईए ने 2017 में यह मामला दर्ज किया था, जिसमें 10 लोगों को नामजद किया गया था, जिनमें से अधिकांश तमिलनाडु के रहने वाले थे। एजेंसी ने आरोप लगाया कि हाजा फकरुद्दीन और खाजा मोइदीन ने एक आतंकी मॉड्यूल बनाया था, जो फंड जुटाता था, शिविर आयोजित करता था, भर्ती करता था और लोगों को सीरिया में आईएसआईएस में शामिल होने के लिए भेजता था। 2018 में, एनआईए ने मोइदीन, फकरुद्दीन (फरार), अंसार मीरान और शकुल हमीद के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया। हमीद बाद में मुखबिर बन गया।
अदालत का फैसला
अदालत ने अपने फैसले में कहा, “खाजा मोइदीन और अंसार मीरान को किसी भी आतंकी संगठन, जिसमें आईएसआईएस भी शामिल है, से जोड़ने वाला कोई सबूत नहीं है।” अदालत ने यह भी कहा कि मुखबिरों की गवाही में भी आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला। “मुखबिरों द्वारा दी गई गवाही से पता चलता है कि आतंकवाद या हिंसा से जुड़ी कोई चर्चा नहीं हुई थी।” अदालत ने यह भी कहा कि केवल एक-दूसरे के संपर्क में रहना साजिश साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
प्रभाव और आगे की कार्यवाही
यह फैसला एनआईए के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। मोइदीन पहले भी कई मामलों में गिरफ्तार हो चुके हैं और फिलहाल बेंगलुरु जेल में बंद हैं। उन्हें 2020 में दिल्ली पुलिस ने एक कथित आतंकी साजिश में गिरफ्तार किया था। अंसार मीरान को आतंकी साजिश के आरोपों से बरी कर दिया गया, लेकिन सिंगापुर के एक भारतीय मूल के व्यक्ति हाजा फकरुद्दीन को शरण देने के लिए चार साल की सजा सुनाई गई।
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- अदालत ने स्पष्ट किया कि सबूतों के अभाव में किसी को भी आतंकवाद का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
- यह मामला भारत में आतंकवाद विरोधी जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।
- मोइदीन और मीरान के खिलाफ अन्य मामले अभी भी लंबित हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
खाजा मोइदीन पर क्या आरोप थे?
उन पर आईएसआईएस के लिए युवाओं को कट्टरपंथी बनाने, भर्ती करने और सीरिया भेजने का आरोप था।
अदालत ने उन्हें क्यों बरी किया?
अदालत ने कहा कि उनके आईएसआईएस से संबंध या किसी आतंकी साजिश में शामिल होने का कोई सबूत नहीं है।
अंसार मीरान को क्या सजा मिली?
उन्हें आतंकी साजिश के आरोपों से बरी कर दिया गया, लेकिन एक संदिग्ध को शरण देने के लिए चार साल की सजा सुनाई गई।
एनआईए ने इस मामले में क्या कहा?
एनआईए ने फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
स्रोत: www.hindustantimes.com